brain fingerprinting technology

Brain fingerprinting technology क्या हैं और यह कैसे काम करती हैं?

Brain fingerprinting technology आप फिल्मो को देखने के शौकीन हो तो आपने फिल्मो में कई बार ऐसे सीन देखे होंगे जिसमे मशीन का उपयोग करते हुए झूठ पकड़ते हैं। उदाहरण के ‘गॉड, तुस्सी ग्रेट हो’ नामक फ़िल्म में एक ऐसी मशीन दिखाई गई थी जो बताती थी कि व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। हम सभी को लगता हैं कि यह नामूनकिन है , और यह कल्पना हुआ करती थी।

लेकिन विज्ञान इतना आगे पहुच चुका हैं कि अब मुश्किल से मुश्किल चीज भी आसान लगती हैं। इस प्रकार की मशीन का अविष्कार हो चुका है जो किसी भी व्यक्ति का झूठ पकड़ सकती हैं। इस तकनीकी को Brain Fingerprinting कहा जाता हैं। आज के इस लेख में हम brain fingerprinting technologyक्या हैं’ (What is Brain Fingerprinting in Hindi) के बारे में बताएंगे।

Brain Fingerprint Technology क्या हैं? What is Brain Fingerprinting in Hindi

 Brain fingerprinting technology एक प्रकार की  ऐसी प्रौद्योगिकी हैं जो एलेक्ट्रोइंसफलोग्राफी (Electroencephalography) का उपयोग करते हुए पता लगाते हैं कि व्यक्ति के दिमाग में किसी प्रकार की यादाश्त है या फिर नहीं। यह एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसमें इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी का उपयोग करके किसी भी व्यक्ति का झूठ पकड़ा जा सकता है।

ब्रेन फिंगर प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करते हुए दिमाग मे क्या चल रहा है यह कम्प्यूटर स्क्रीन पर देखा जा सकता हैं। पुलिस डिपार्टमेंट के द्वारा इस तकनीकी का उपयोग अब कई मुख्य केस मे किया जा रहा है

brain fingerprinting technology के माध्यम से इलेक्ट्रिकल ब्रेनवेव्स और दिमाग के द्वारा दी जा रही प्रतिक्रिया को मापा  जाता हैं। इससे पता चलता हैं कि दिमाग मे इस प्रकार की कोई मेमोरी है या फिर नहीं। जैसे कि अगर किसी क्रिमिनल से ट्रेन के बारे में कुछ सवाल पूछा जाता है तो उसके दिमाग में उससे जुड़ी हुई घटनाए चलने लगेगी। वह जुबान से तो ना बोल सकता हैं लेकिन उसके दिमाग मे उस घटना की तस्वीर आने लगेगी।

 ऐसे में Brain Fingerprinting के P300 Response के माध्यम से पता लगाया जा सकता हैं कि वह सच बोल रहा है या झूठ।

इस तकनीकी को आज तक विद्वानों ने बिल्कुल सही नही माना हैं। इस पर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं, यह अविश्वसनीय हैं, इसको लेकर कई बार कॉन्ट्रोवर्सीज भी होती हैं। कई बार ऐसा भी देखा गया हैं कि इस तकनीकी से वो रिजल्ट सामने नही आये जो आने चाहिये थे।

कई बार मानवाधिकार वाले एनजीओ आदि ने भी इस तकनीकी को लेकर सवाल उठाए हैं। इसी प्रकार की एक तकनीकी पॉलीग्राफी के भी इसके साथ तुलना करते हुए मिश्रित रिजल्ट देखे गए हैं।

Brain Fingerprinting technology कैसे काम करती हैं?

आप यह समझ चुके हैं कि Brain Fingerpriting क्या है लेकिन ब्रेन फिंगएरप्रिंटिंग के काम करने के तरीके को भी समझना जरूरी हैं। Brain Fingerprint technology एक बेहतरीन आविष्कार है जिसे पूर्ण रूप से सटीक तो नही माना जा सकता लेकिन इसकी एक्यूरेसी रेट काफी ज्यादा है, जो उसे एक आधुनिक और बेहतरीन आविष्कार बनाती हैं। इससे दिमाग को कम्प्यूटर स्क्रीन पर पढा जा सकता हैं।

Brain Fingerprint तकनीकी मस्तिष्क में इमेज से जुड़ी हुई घटनाओं के भाग या फिर कहा जाये तो मेमोरी के P300 कंपोनेंट्स का उपयोग करती हैं। अगर आप P300 का मतलब नही समझते तो बता दे कि P300 इस बात को संदर्भित करता हैं कि प्रतिक्रिया इलेक्ट्रिकली पॉजिटिव या नेगटिव है और इसकी लेटेंसि P300 के कितने आस पास  है। यानी कि जब घटना से जुड़े हुए सवाल किये जाते हैं तब घटनाओं की तस्वीर और जानकारी दिमाग मे उभरने लगती है और उस समय दिमाग को पढ़कर सच या झूठ का पता लगाया जा सकता हैं।

पहले  P300 रिसर्च से दिमाग से मिल रहे रिस्पॉन्स को बहुत ही ज्यादा एग्रेसिवनेस (उत्तेजना) वाले पर ही टेस्ट किया जाता था । इसके बाद वैज्ञानिकों ने ज्यादा कॉम्प्लेक्स उत्तेजनाओं को डेवलप करना  शुरू कर दिया। ज्यादा समृद्ध और जटिल उत्तेजना के साथ रेस्पॉन्स बहुत तेजी से आने लगे , बता दे कि Brain Fingerprint technology के लिए उपयोग किए जाने वाले Electroencephalograph Signal को मस्तिष्क (दिमाग) से Non-Invasively तरीके से रिकॉर्ड किया जाता है।

क्या Brain Fingerprinting technologyका उपयोग करना सही हैं?

कई मामलों में यह कहा गया हैं कि ब्रेन फिंगएरप्रिंटिंग तकनीक से दिमाग और दिमाग की नसों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता हैं। ऐसे में मानवाधिकार की परवाह करने वाले लोगो की तरफ से इसका विरोध किया गया। क्योंकि इस उपयोग हर व्यक्ति या फिर क्रिमिनल पर नही किया जाता इसलिए यह उतना महत्वपूर्ण नहीं हैं। Lie Detection के लिए कई प्रकार की अन्य तकनीक भी मौजूद हैं लेकिन उनमें से ब्रेन फिंगएरप्रिंटिंग  उन तकनीकों में शामिल है जिनकी Accuracy Rate सबसे ज्यादा हैं।

Brain Fingerprint Technology 1999 में उपयोग किया जा रहा हैं। भारत सहित अन्य कई विकसित और विकाशशील देशो में ब्रेन फिंगएरप्रिंटिंग  तकनीक का इस्तेमाल पुलिस डिपार्टमेंट के माध्यम से किया जाता हैं। लेकिन ब्रेन फिंगएरप्रिंटिंग टेक्नॉलजी और इस प्रकार की अन्य Lie Detection Techniques का उपयोग केवल ब्रह्द महत्वपूर्ण केसों में ही किया जाता हैं। अगर कोई व्यक्ति सोचे कि हर प्रकार की छोटे मोटे केस में इसका उपयोग किया जाएगा, तो वह गलत होगा क्योंकि ब्रेन फिगएरप्रिंटिंग दिमाग पर नकारात्मक असर डाल सकता हैं।

आज के इस लेख में हमने एक आधुनिक प्रौद्योगिकी ‘Brain Fingerprinting ‘ बारे में जाना। इस लेख में हमने ‘ब्रेन फिंगरप्रिटिंग क्या हैं’ (What is Brain Fingerprinting  in Hindi) और ‘ब्रेन फिंगरप्रिंटिंग कैसे काम करती हैं’ (How Brain Fingerprinting technology Works in Hindi) जैसे विषयों पर बात की। अगर आपके दिमाग मे अब भी ब्रेन फिंगएरप्रिंटिंग से जुड़ा हुआ कोई सवाल हैं तो हमे Comment करके जरूर बता

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